यदि कोई हिंदू कहता है कि मुसलमान को यहां नहीं रहना चाहिए तो वह व्यक्ति हिंदू नहीं हो सकता: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने हिन्दू- मुस्लिम एकता की बातों को भ्रामक बताते हुए कहा है कि यह दोनों अलग नहीं है, मॉब लिंचिंग, भारत में इस्लाम पर कई बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने डीएनए का भी जिक्र किया जिसकी चर्चा हो रही है। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भागवत ने एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम के दौरान 5 बड़ी बातें कहीं –

एक बार फिर DNA की चर्चा
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू- मुस्लिम एकता की बातें भ्रामक हैं क्योंकि यह दोनों अलग नहीं बल्कि एक है। उन्होंने कहा कि सभी भारतीयों का DNA एक है, चाहें वो किसी भी धर्म के क्यों न हो। लोगों के बीच पूजा पद्धति के आधार पर अंतर नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह सिद्ध हो चुका है कि हम 40 हजार साल से एक ही पूर्वज के वंशज हैं। भारत में लोगों का डीएनए एक जैसा है।

भारत में इस्लाम खतरे में है ?
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भय के इस चक्र में न फंसे कि भारत में इस्लाम खतरे में है। उन्होंने कहा कि विकास देश में एकता के बिना संभव नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि एकता का आधार राष्ट्रवाद और पूर्वजों का गौरव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम संघर्ष का एकमात्र समाधान ‘संवाद’ है, न कि ‘विसंवाद’। उन्‍होंने कहा कि भारत में इस्‍लाम को किसी तरह का खतरा नहीं है। मुसलमानों को इस तरह के किसी डर में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई हिंदू कहता है कि किसी मुसलमान को यहां नहीं रहना चाहिए तो वह व्यक्ति हिंदू नहीं हो सकता। ऐसा कहने से वो चर्चा में आ सकता है लेकिन इसके बाद वो हिंदू नहीं है।

मॉब लिंचिंग पर संघ प्रमुख ने कही ये बात
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मॉब लिंचिंग में शामिल लोगों पर हमला बोलते हुए कहा कि ऐसे लोग हिंदुत्व के खिलाफ है। गाय एक पवित्र जानवर है लेकिन जो लोग दूसरों को मार रहे हैं वे हिंदुत्व के खिलाफ जा रहे हैं। कानून को बिना किसी पक्षपात के उनके खिलाफ अपना काम करना चाहिए।

राजनीति नहीं करता संघ
मोहन भागवत ने कहा कि हम एक लोकतंत्र में हैं। यहां हिंदुओं या मुसलमानों का प्रभुत्व नहीं हो सकता। यहां केवल भारतीयों का वर्चस्व हो सकता है। भागवत ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि वह न तो कोई छवि बनाने के लिए कार्यक्रम में शामिल हुए हैं और न ही वोट बैंक की राजनीति के लिए। उन्होंने कहा कि संघ न तो राजनीति में है और न ही यह कोई छवि बनाए रखने की चिंता करता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा संघ राष्ट्र को सशक्त बनाने और समाज में सभी लोगों के कल्याण के लिए अपना कार्य जारी रखता है।

केवल भारतीयों का वर्चस्व
कार्यक्रम की शुरुआत में ही संघ प्रमुख ने कहा कि वो कोई छवि बनाने के लिए कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम एक लोकतंत्र में हैं और यहां हिन्दुओं या मुसलमानों का प्रभुत्व नहीं हो सकता है। यहां केवल भारतीयों का वर्चस्व हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.