सफदरजंग अस्पताल में 2 महीने में कुल 219 डॉक्टर छुट्टी पर करेंगे आराम, सैकड़ों मरीज़ अस्पताल में परेशान !

दिल्ली में कोविड के करीब 600 केस रोज सामने आ रहे हैं और मौसमी बीमारियों के मरीज़ों की तादाद दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। मगर इस सबसे बेपरवाह सफदरजंग अस्पताल के टीचिंग केडर के करीब 219 डॉक्टर 2 महीने में दो चरणों में गर्मियों की छुट्टी पर जा रहे हैं। इनमें से 115 डॉक्टर 7 मई से छुट्टी पर जा चुके हैं।

एनस्थीसिया विभाग ने की ऑपरेशन लिस्ट घटाने की मांग

इसका असर ये हुआ है कि अस्पताल में कम डॉक्टर होने की वजह से एनस्थीसिया विभाग ने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल अधीक्षक को पत्र लिखकर मरीज़ों के ऑपरेशन की लिस्ट को घटाने की मांग की है। अब मरीज़ों को ऑपरेशन के लिए महीनों का इंतजार करना पड़ रहा है और उनके इलाज में देरी हो रही है।

सफदरजंग अस्पताल के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज की प्रिंसीपल डॉ. गीतिका खन्ना समेत करीब 219 डॉक्टर 7 मई से 14 जुलाई तक दो चरण में गर्मियों की छुट्टी पर जा रहे हैं। 7 मई से लेकर 9 जून तक करीब 115 डॉक्टर छुट्टी पर हैं जबकि 11 जून से 14 जुलाई तक 104 डॉक्टर छुट्टी पर रहेंगे। छुट्टी पर जाने वाले डॉक्टर्स में तमाम विभागों के डायरेक्टर प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर शामिल हैं। गर्मी की छुट्टियों को लेकर मेडिकल कॉलेज की प्रिंसीपल डॉ. गीतिका खन्ना ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया है जिसमें उनके खुद भी गर्मियों की छुट्टी पर जाने की जानकारी है।

काम में जुटे मेडिकल छात्र, प्रोफेसर छुट्टी पर

अहम बात ये है कि वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज के पीजी के छात्र जो क्लीनिकल स्पेशियलिटी सेवाओं में लगे हैं वो छुट्टी पर नहीं हैं लेकिन उनके मेडिकल प्रोफेसर गर्मियों की छुट्टियां मनाने चले गए हैं।

इतनी बड़ी तादाद में डॉक्टर्स के छुट्टी पर जाने से अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था डगमगा गई है। अस्पताल के एनस्थीसिया विभाग ने मेडिकल सुप्रीटेंडेंट को पत्र लिखकर डॉक्टर्स की छुट्टी का हवाला देते हुए ऑपरेशन थिएटर लिस्ट में कटौती की मांग की है। यानि डॉक्टर्स की छुट्टी की वजह से प्रतिदिन बहुत कम मरीज़ों का ऑपरेशन होगा और मरीज़ों की पेंडेंसी बढ़ती जाएगी। 

ओपीडी और आपातकालीन सेवाओं पर बुरा असर

डॉक्टर्स के गर्मी की छुट्टियों पर जाने का बुरा असर ओपीडी सेवाओं और आपातकालीन सेवाओं पर भी देखा जा रहा है। ओपीडी में मरीज़ों की भारी भीड़ देखी जा रही है। ऑपरेशन के लिए मरीज़ों को तारीख मिलने में दिक्कत रही है। टीबी, कैंसर, किडनी और हृदय रोग जैसी बीमारियों से ग्रस्त मरीज़ों को ऑपरेशन के लिए लम्बा इंतज़ार करना पड़ रहा है। ये समस्या इसलिए बड़ी है क्योंकि सरकारी अस्पतालों में कई मामलों में जब तक मरीज़ के ऑपरेशन का नंबर आता है तब तक उसका निधन हो चुका होता है।

फाइल तस्वीर

इस मामले को लेकर जब दैनिक नवोदय ने वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज की प्रिंसीपल डॉ. गीतिका खन्ना से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय की इजाज़त के बिना प्रेस से बात करने से मना कर दिया। इस बाबत जब हमने सफदरजंग अस्पताल के पीआरओ अतुल सिंह से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के पर्सनल सेक्रेटरी से बात करने को कहकर पीछा छुड़ा लिया।

सफदरजंग अस्पताल में रोज़ 8000 मरीज़ों से ज्यादा ओपीडी सेवाओं में इलाज के लिए आते हैं जबकि 1000 से ज्यादा मरीज़ आपातकालीन सेवाओं के तहत अपना इलाज कराते हैं। ऐसे में अगर इतनी बड़ी तादाद में एक साथ डॉक्टर छुट्टी पर चले जाएंगे तो इन मरीज़ों का क्या होगा? अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं के इस तरह डगमगाने पर केंद्रीय मत्री मनसुख मंडाविया और स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण को संज्ञान लेने की ज़रूरत है।

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